हज़रत दाऊद बिन रशीद (रह.) फ़रमाते हैं: मुल्क-ए-शाम (सीरिया) में दो हसीन-ओ-जमील इबादतगुज़ार नौजवान रहते थे। कसरत-ए-इबादत (अधिक इबादत) और तक़्वा व परहेज़गारी की वजह से उन्हें 'सबीह' और 'मलीह' के नाम से पुकारा जाता था।
उन्होंने अपना एक वाक़िया कुछ यूं बयान किया: एक मर्तबा हमें भूख ने बहुत ज़्यादा तं...