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27 November, 2024
नबी करीम ﷺ की तर्बियत का एक तरीक़ा यह था कि पहले ग़लती का एहसास दिलाते थे, फिर नसीहत फ़रमाते थे। एक मर्तबा आप सहाबा इकराम की मजलिस में तशरीफ़ फ़रमा थे, एक नौजवान मस्जिद में दाख़िल हुआ और इधर-उधर देखने लगा, गोया किसी की तलाश में है। उसे रसूलुल्लाह ﷺ दिखाई दिए, वह आपकी तरफ़ आया और कहने लगा, "या रसूलुल...