"अध्ययन (مطالعہ) करने का भी एक तरीका होता है; जाहिर है हर चीज़ पढ़ने के लायक नहीं होती है, और यह उधार की (अस्थायी) ज़िंदगी इस फिजूलखर्ची की इजाज़त नहीं देती है। ज़ेरे-नज़र (विचाराधीन) किताब इस विषय पर एक बेहतरीन चीज़ है। गूगल पर सर्च करके आप इसे पीडीएफ (PDF) के रूप में पढ़ सकते हैं 💓!!"
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