खानदान और खून की पहचान
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खानदान और खून की पहचान

सुल्तान महमूद गज़नवी का दरबार लगा हुआ था। दरबार में हज़ारों लोग शामिल थे जिनमें औलिया, कुत्ब और अब्दाल भी थे। सुल्तान महमूद ने सबको संबोधित करके कहा, "क्या कोई शख्स मुझे हज़रत ख़िज़्र अलैहिस्सलाम की ज़ियारत (मुलाकात) करा सकता है?" सब खामोश रहे। दरबार में बैठा एक गरीब ग्रामीण (देहाती) खड़ा हुआ और कह...