"जब इंसान अपनी ज़िद, ग़ुरूर (अहंकार) और अना (अहम) के खोल में...
Ummah Post
6 June, 2025

"जब इंसान अपनी ज़िद, ग़ुरूर (अहंकार) और अना (अहम) के खोल में बंद हो जाता है, तो फिर सच्चाई की रोशनी भी उसके दिल तक नहीं पहुँचती। इल्म (ज्ञान) तब ही असर करता है जब दिल झुकने को तैयार हो, और सीखने वाला खुद को खाली महसूस करे। लेकिन जब कोई सिर्फ अपनी बरतरी (श्रेष्ठता) साबित करने पर तुल जाए, तो वह सच को नहीं, सिर्फ अपनी अना (अहंकार) को जिताता है और इस तरह इल्म, अक़्ल और फ़हम (समझ) सब हार जाते हैं।"

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शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी
लेख

शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी

हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ि.) एक बहुत महान सहाबी (पैगंबर के साथी) थे। सभी सहाबा इकराम में उन्होंने सबसे लंबी उम्र पाई थी। वह सभी लोगों की सेवा करते थे और बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते थे। हज़रत उमर (रज़ि.) ने अपने शासनकाल के दौरान उन्हें मदायन शहर का गवर्नर बना दिया था; लेकिन हज़रत सलमान फ़ारसी की सादग...