"वक़्त और बख़्त (भाग्य) कभी साथ नहीं चलते, कभी 'वक़्त' हाथ छुड़ा...
Ummah Post
6 June, 2025

"वक़्त और बख़्त (भाग्य) कभी साथ नहीं चलते, कभी 'वक़्त' हाथ छुड़ा लेता है तो कभी 'बख़्त'। अगर इत्तेफाक से दोनों मिल जाएं, तो इंसान की तक़दीर बदल देते हैं।" ✍🏻

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शीशे से दीवार तक
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शीशे से दीवार तक

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