"जो व्यक्ति छुपकर गुनाह करे, वह चुपके से तौबा (पश्चाताप) करे; और जो खुल्लम-खुल्ला ज्यादती (उल्लंघन) करे, वह खुले आम तौबा करे; क्योंकि अल्लाह माफ़ करता है, मलामत (निंदा) नहीं करता; और लोग मलामत करते हैं, माफ़ नहीं करते!"
— इमाम मैमून बिन मेहरान (रहमहुल्लाह)
(अल-बिदाया वन-निहाया: 9/347)