"मैं जानता हूँ कि दिलासे के तमाम शब्द मिलकर भी दिल में बने ए...
Ummah Post
9 June, 2025

"मैं जानता हूँ कि दिलासे के तमाम शब्द मिलकर भी दिल में बने एक सूराख (छेद) को नहीं भर सकते, तो फिर तुम्हारे दिल का क्या हाल होगा जो छननी की तरह है, जिसके हर सूराख से कोई अज़ीज़ (प्रियजन) गुज़रा और चला गया।"

— अधम शरकावी

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'रहमान' और 'रहीम' नाम के उपयोग के शरई अहकाम
लेख

'रहमान' और 'रहीम' नाम के उपयोग के शरई अहकाम

"रहमान" शब्द का प्रयोग अल्लाह तआला के अलावा किसी और के लिए करना जायज़ नहीं है, बल्कि हराम है। अगर कोई व्यक्ति किसी इंसान को "रहमान" कहे तो यह शिर्क है, क्योंकि अल्लाह तबारक व तआला के अलावा कोई भी ऐसा नहीं हो सकता जिसकी रहमत (दया) इतनी विशाल हो। इसलिए किसी और को रहमान या अर-रहमान कहना जायज़ नहीं है।...