रिश्तों को अपने क़ाबू में करने के लिए...
वज़ाइफ़ (विशेष प्र...
Ummah Post
20 June, 2025

रिश्तों को अपने क़ाबू में करने के लिए...

वज़ाइफ़ (विशेष प्रार्थनाओं) या तावीज़ों की ज़रूरत नहीं है।

बल्कि उन रिश्तों से जुड़े रिश्तों का सम्मान (एहतराम) करना शुरू कर दें।

वे बिना मांगे ही सब कुछ क़ुर्बान कर देंगे।

Share this article
हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)
लेख

हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)

एक बार हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी (रह.) पर ग़द्दारी (राजद्रोह) का मुक़दमा चला और फ़िरंगी (अंग्रेज़) की अदालत हॉल कराची में उनकी पेशी हुई। मौलाना मोहम्मद अली जौहर और बहुत सारे दूसरे अकाबरीन (वरिष्ठ नेता) भी वहाँ जमा थे। फ़िरंगी ने बुलाया और कहा, "हुसैन अहमद! यह जो तुमने फ़तवा दिया है कि अंग्रेज़ की...