हर जुस्तजू (खोज) अबस (व्यर्थ) है जो तेरी जुस्तजू न हो,
दिल...
Ummah Post
23 June, 2025

हर जुस्तजू (खोज) अबस (व्यर्थ) है जो तेरी जुस्तजू न हो,

दिल संग-ओ-खिश्त (पत्थर और ईंट) है जो तेरी आरज़ू न हो।

— (मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ान ग़ालिब)

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कलमा पढ़ी हुई मेम
लेख

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