मैं ग़रीबों से ही करता हूँ तिजारत (व्यापार) अक्सर;
जो चंद प...
Ummah Post
28 June, 2025

मैं ग़रीबों से ही करता हूँ तिजारत (व्यापार) अक्सर;

जो चंद पैसों में लाखों की दुआ देते हैं।

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एक खामोश सबक़
लेख

एक खामोश सबक़

एक शादी समारोह में, एक सज्जन अपने एक परिचित व्यक्ति के पास गए और पूछा, "क्या आपने मुझे पहचाना?" उन्होंने ध्यान से देखा और कहा, "हाँ, तुम मेरे प्राइमरी स्कूल के छात्र हो। आजकल क्या कर रहे हो?" छात्र ने जवाब दिया, "मैं भी आपकी तरह एक स्कूल टीचर हूँ। और टीचर बनने की यह इच्छा मुझमें सिर्फ़ आपकी वजह से ह...