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             *و إذا تعلّقت القـــــلوبُ بِربها*...
Ummah Post
1 July, 2025

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*و إذا تعلّقت القـــــلوبُ بِربها*

*طابت لهَا الدنيا بِرغم أساها*

*قل للأماني السائراتِ لِـربهّا*

*الله يســـــمعهَا ولا ينـساهَا*

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"और जब दिल अपने रब से वाबस्ता (जुड़) हो जाएं,

तो दुनिया अपनी सारी तकलीफ़ों के बावजूद ख़ुशगवार लगती है।

उन तमन्नाओं से कहो जो अपने रब की जानिब रवां-दवां (बढ़ रही) हैं,

अल्लाह उन्हें सुनता है और कभी नहीं भूलता।"

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हुज़ूर ﷺ का अपने साथियों के साथ सुलूक
लेख

हुज़ूर ﷺ का अपने साथियों के साथ सुलूक

हज़रत हुसैन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) फ़रमाते हैं कि मैंने अब्बा जान सैयदुना अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से पूछा कि हुज़ूर ﷺ अपने हम-नशीनों (साथियों) के साथ कैसे रहते थे? आपने फ़रमाया: "आप ﷺ ख़ंदा-रू (हँसमुख), ख़ुश-अख़लाक़ (अच्छे आचरण वाले) और नर्म-ख़ू (नर्म स्वभाव के) थे। बद-अख़लाक़ी, सख़्त-मिज़ाजी...