खुदी का फ़लसफ़ा सुन कर दुआएं कांप उठती हैं,
चिराग़-ए-दिल की...
Ummah Post
2 July, 2025

खुदी का फ़लसफ़ा सुन कर दुआएं कांप उठती हैं,

चिराग़-ए-दिल की हिद्दत (तपिश) से हवाएं कांप उठती हैं।

सलाखें अपने ज़िन्दां (क़ैदख़ाने) की ज़रा मज़बूत रखना तुम,

कि शाहीं (बाज़) फड़फड़ाए तो फ़जाएं (हवाएं) कांप उठती हैं।

हमें सूली पर चढ़ा करके भी बहुत मायूस होगे तुम,

हमारी मुस्कराहट पर सजाएं कांप उठती हैं।

..........

— आबी मखनवी

Share this article
सच्चे प्रेम की परीक्षा और नबी ﷺ की आज्ञाकारिता
लेख

सच्चे प्रेम की परीक्षा और नबी ﷺ की आज्ञाकारिता

मेरे बुख़ारी शरीफ़ के उस्ताद-ए-मोहतरम, साकिन-ए-बक़ी (बक़ी के निवासी), हज़रत अक़दस मौलाना इस्लाम-उल-हक़ साहब रहमतुल्लाह अलैह ने बुख़ारी शरीफ़ के दर्स (व्याख्यान) में एक क़ीमती बात बताई थी कि मोहब्बत का पता टकराव और मुक़ाबले के वक़्त चलता है। मिसाल के तौर पर, आप बज़ाहिर ऐसा महसूस कर रहे हैं कि मुझे अप...