हक़ीक़त यह है कि यौम-ए-आशूरा (आशूरा के दिन) को सय्यिदुना हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) की शहादत की वजह से फ़ज़ीलत (महत्व) हासिल नहीं हुई, बल्कि ख़ुद हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) को इस मुबारक दिन शहीद होने की इज़ाफ़ी (अतिरिक्त) फ़ज़ीलत हासिल हुई!
✍️... बंदा मुबीन उर रहमान