मुसलमां रात-दिन सरगर्म (व्यस्त) हैं महलों की ख़्वाहिश में,...
Ummah Post
7 July, 2025

मुसलमां रात-दिन सरगर्म (व्यस्त) हैं महलों की ख़्वाहिश में,

किसे सरकार-ए-दो आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का अब घर याद आता है।

मुसलमानों ज़रा सोचो,

है क्या पाया है क्या खोया।

💔💔💔

Share this article
रश्क के क़ाबिल एक वाक़िया
लेख

रश्क के क़ाबिल एक वाक़िया

एक तुर्क मुसलमान मस्जिद-ए-नबवी शरीफ़ के अहाते (प्रांगण) में खड़े होकर अपना आँखों देखा वाक़िया इस तरह बयान करता है: मैं मस्जिद-ए-नबवी में खड़ा देख रहा था कि चार पुलिसवाले किसी का इंतज़ार कर रहे हैं। फिर एक शख़्स नमूदार (प्रकट) हुआ तो पुलिसवालों ने भागकर उसे क़ाबू में कर लिया और उसके हाथ जकड़ लिए।...