कोई नाम हो न मक़ाम हो,
बस तेरी रज़ा का सलाम हो।
मेरे हर क़दम पे तेरा करम,
मेरे दिल में तेरा कलाम हो।
न दौलतों का ग़ुरूर दे,
न शोहरतों का सरूर दे।
बस ऐसी तौफ़ीक़ अता हो रब,
कि इबादतों में सरूर दे।
न मैं ऊँचा बनूँ, न नीचा रहूँ,
तेरी मख़्लूक़ (सृष्टि) से कभी न उलझूँ।
मेरे ज़र्फ़ (हृदय) को इतना कुशादा (विशाल) कर,
कि मैं सब्र और शुक्र की राह पर चलूँ।
मेरे दिल को तू नूर दे,
मेरे लफ्ज़ को तू शऊर (समझ) दे।
मेरे हाल पे कर नज़र-ए-करम,
मेरे अमल को तू क़बूल दे।
तेरी रज़ा मेरी ज़िंदगी हो,
तेरा ख़ौफ़ मेरी बंदगी हो।
न हो फ़रेब, न हो दिखावा,
बस इख़्लास (ईमानदारी) हो, सादगी हो।
🕊️🌙 अल्लाह का क़ुर्ब (समीप्य) ही सबसे बड़ी दौलत है…