निगाह (दृष्टि)
✨ निगाह जब हया (शर्म) खो दे, तो गुनाह दरवाज़ा नहीं, राह बन जाते हैं। ✨
🌙 निगाह की ख़यानत (धोखा) दिल को अंधा कर देती है। 🌙
💔 निगाह नीची हो तो दिल ऊंचा हो जाता है। 💔
⚡ निगाह पाक (पवित्र) हो तो दिल भी पाक रहता है। ⚡
🔥 निगाह का एक तीर, इफ़्फ़त (पवित्रता) की ढाल को चीर देता है। 🔥
💞 निगाह वह आईना है, जिसमें नीयत की झलक साफ़ दिखती है। 💞
⚖️ निगाह की हिफ़ाज़त (सुरक्षा), ईमान की अलामत (निशानी) है। ⚖️
🍂 निगाह से गर दिल फिसल जाए, तो वापसी का रास्ता मुश्किल हो जाता है। 🍂
🌸 निगाह का पहला वार ही सबसे ज़्यादा ख़तरनाक होता है। 🌸
💎 निगाह झुक जाए तो शैतान हार जाता है। 💎