عن أبي أُمامةَ رضيَ اللهُ عنه، قال: قال رسولُ الله صلَّى الل...
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18 July, 2025

عن أبي أُمامةَ رضيَ اللهُ عنه، قال: قال رسولُ الله صلَّى الله عليه وسلَّمَ:

«أكثِروا علَيَّ مِنَ الصَّلاةِ في كلِّ يومِ جُمُعةٍ؛ فإنَّ صلاةَ أُمَّتي تُعرَضُ علَيَّ في كلِّ يومِ جُمُعةٍ،

فمَنْ كان أكثَرَهم علَيَّ صلاةً؛ كان أقرَبَهم مِنِّي مَنزِلةً».

अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया:

"हर जुमा (शुक्रवार) के दिन मुझ पर कसरत से दरूद (दुआ-ए-रहमत) भेजा करो; क्योंकि मेरी उम्मत का दरूद हर जुमा को मेरे सामने पेश किया जाता है, अतः जो उनमें से मुझ पर सबसे ज़्यादा दरूद भेजने वाला होगा; वह मर्तबे (स्थान) में मेरे सबसे करीब होगा।"

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पांच व्यापक तफ़सीरें (पांच जामे तफ़ासिर)
लेख

पांच व्यापक तफ़सीरें (पांच जामे तफ़ासिर)

शेख़-उल-हदीस हज़रत मौलाना मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब (दामत बरकातुहुम) अपनी मशहूर तस्नीफ़ "उलूम-उल-क़ुरआन" में लिखते हैं: "यह पांच तफ़सीरें (यानी तफ़सीर-ए-कबीर, तफ़सीर इब्न कसीर, तफ़सीर-ए-क़ुर्तुबी, तफ़सीर रूह-उल-मआनी और तफ़सीर-ए-कश्शाफ़) अहक़र (इस नाचीज़) के मामूली ज़ौक़ के मुताबिक ऐसी हैं कि अगर...