*जहेज़ लेते वक्त मज़हब भूल जाते हैं,*
*हक़ महर लिखते वक्त द...
Ummah Post
21 July, 2025

*जहेज़ लेते वक्त मज़हब भूल जाते हैं,*

*हक़ महर लिखते वक्त दीन याद आता है।*

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खाना किसने भेजा?
लेख

खाना किसने भेजा?

इमाम क़ुर्तुबी (रह.) फ़रमाते हैं कि क़बीला-ए-अशअरीयीन के लोग जब हिजरत करके मदीना मुनव्वरा पहुँचे, तो उनका खाने-पीने का तमाम सामान ख़त्म हो चुका था। चुनाँचे उन्होंने अपना एक आदमी रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में भेजा कि हमारे खाने-पीने का कोई इंतज़ाम किया जाए। वह आदमी जब रसूलुल्लाह ﷺ के घर के दरवाज़े पर पह...