इन दुआओं को अपनी ज़िंदगी का अटूट हिस्सा (जुज़-ए-लायुन्फ़क) ब...
Ummah Post
4 October, 2024

इन दुआओं को अपनी ज़िंदगी का अटूट हिस्सा (जुज़-ए-लायुन्फ़क) बना लीजिए और इसकी बरकतें अपनी आँखों से देखिए।

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हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
लेख

हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

मुदर्रिसीन (शिक्षकों) को चाहिए कि हर तालिब-ए-इल्म (छात्र) को पूरा अरबी पढ़ाना ज़रूरी न समझें, जिसके अंदर मुनासबत (योग्यता) देखें, और फ़हम-ए-सलीम (सही समझ) पाएँ, उसको सब किताबें पढ़ा दें, और जिसको मुनासबत न हो, या फ़हम-ए-सलीम न हो, उसको बक़द्रे-ज़रूरत (ज़रूरत के मुताबिक़) मसाइल पढ़ा कर कह दें कि जाओ...