अस्सलामू अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू,

उम्मीद है आप खैर...
Ummah Post

अस्सलामू अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू,

उम्मीद है आप खैर व आफ़ियत (सकुशल) से होंगे।

मुझे इस ऐप के एडमिन से गुज़ारिश है कि आपने इसमें नमाज़ के औक़ात (समय) का जो फ़ीचर दिया है, उसमें अपडेट करने की ज़रूरत है, ताकि हर इलाक़े वाले अपने इलाक़े के हिसाब से नमाज़ के औक़ात को सेट कर सकें। अभी क्या होता है कि लोकेशन के हिसाब से ऑटोमैटिक सेट हो जाता है।

मेरी गुज़ारिश यह है कि नमाज़ के औक़ात वाले सेक्शन को इस तरह से बनाया जाए कि हर यूज़र अपनी मस्जिद के हिसाब से नमाज़ के औक़ात को सेट कर सकें।

उम्मीद है कि मेरी बात पर ग़ौर व तलब (ध्यान) किया जाएगा।

वैसे माशाअल्लाह इस ऐप के बारे में सुनकर और यूज़ करके बहुत खुशी हुई, लेकिन अगर साथ में नमाज़ के औक़ात को अपडेट कर दें, तो और ज़्यादा मज़ीद बेहतरी (और सुधार) हो सकती है।

मीर महमूदुल हसन क़ास्मी

Share this article
खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!
लेख

खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!

इमाम जलालुद्दीन रूमी (रह.) ने लिखा है कि एक आदमी सफर पर निकला। वह एक जंगल में चलता रहा और बहुत दूर चलने के बाद उसे भारी थकान महसूस हुई, जिसके कारण उस पर नींद हावी हो गई। उसने सोचा कि कहीं आराम कर ले; लेकिन सिर्फ इसलिए हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वह जंगल का रास्ता था। उसने सोचा, "जंगल के रास्ते में भला क...