"क्या तुम्हें ग़ैरत (शर्म) नहीं आती?
लोग अल्लाह की तरफ़ तुमसे आगे निकल गए हैं, और तुम हो कि अभी तक अपनी शहवतों (नफ़्सानी ख़्वाहिशात) के पीछे घिसट रहे हो!
ऐ मिस्कीन (बेचारे), ज़रा होश के नाख़ून लो!
(अरबी से अनुवाद)"
"क्या तुम्हें ग़ैरत (शर्म) नहीं आती?
लोग अल्लाह की तरफ़ तुमसे आगे निकल गए हैं, और तुम हो कि अभी तक अपनी शहवतों (नफ़्सानी ख़्वाहिशात) के पीछे घिसट रहे हो!
ऐ मिस्कीन (बेचारे), ज़रा होश के नाख़ून लो!
(अरबी से अनुवाद)"