"मैं जानता हूँ कि तसल्ली के सारे शब्द मिलकर भी दिल में बने ए...
Ummah Post
26 August, 2025

"मैं जानता हूँ कि तसल्ली के सारे शब्द मिलकर भी दिल में बने एक सुराख़ (छेद) को नहीं भर सकते; तो फिर तुम्हारे दिल का क्या हाल होगा जो छलनी की तरह है, जिसके हर सुराख़ से कोई अज़ीज़ (प्रियजन) गुज़रा और चला गया।"

- अधम शरकावी (أدهم شرقاوي)

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मेरे आदरणीय पिता का घरेलू और पारिवारिक जीवन
लेख

मेरे आदरणीय पिता का घरेलू और पारिवारिक जीवन

लेखक: मौलाना मोहम्मद सईद पालनपुरी शिक्षक: जामिया अल-इमाम मोहम्मद अनवर शाह कश्मीरी, देवबंद मेरे आदरणीय पिता हज़रत मौलाना मुफ़्ती सईद अहमद साहब पालनपुरी, पूर्व शेख-उल-हदीस और सदरुल मुदर्रिसीन (प्रधान शिक्षक) दारुल उलूम देवबंद की वफ़ात (देहांत) के बाद से इस लेख को लिखने के समय तक लेख लिखने का सिल...