"ज़फ़र आदमी उसको न जानिए गा, हो वह कैसा ही साहब-ए-फ़हम-व-ज़क...
Ummah Post
21 September, 2025

"ज़फ़र आदमी उसको न जानिए गा, हो वह कैसा ही साहब-ए-फ़हम-व-ज़का (बुद्धिमान और चतुर),

जिसे ऐश (सुख) में याद-ए-ख़ुदा न रही, जिसे तैश (क्रोध) में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा न रहा!

— बहादुर शाह ज़फ़र मरहूम"

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हज़रत तल्हा के इस्लाम क़बूल करने का दिलचस्प वाक़िया
लेख

हज़रत तल्हा के इस्लाम क़बूल करने का दिलचस्प वाक़िया

हज़रत तल्हा (रज़ियल्लाहु अन्हु) अपना इस्लाम क़बूल करने का वाक़िया (घटना) बयान करते हुए फ़रमाते हैं कि: एक मर्तबा मैं बुसरा (بصری) के बाज़ार और मेले में मौजूद था, वहाँ एक पादरी अपने गिरजाघर की ऊपरी मंज़िल (बालो-ख़ाने) में रहता था। उसने एक दिन मेरे सामने लोगों से कहा, "इस बाज़ार और मेले वालों से पूछो...