"कभी जब गुफ़्तगू (बातचीत) फ़रमाते थे मोती पिरोते थे,
कि सब...
Ummah Post
30 September, 2025

"कभी जब गुफ़्तगू (बातचीत) फ़रमाते थे मोती पिरोते थे,

कि सब अल्फ़ाज़ (शब्द) वाज़ेह (स्पष्ट), ग़ैर-मुबहम (असंदिग्ध), साफ़ होते थे।

कलाम (भाषण) ऐसा मुकम्मल (पूर्ण), जामे (व्यापक) व पुर-मग़्ज़ (अर्थपूर्ण) हक़्क़ानी (सत्य से भरपूर),

न बिल्कुल मुख़्तसर (संक्षिप्त), मुग़लक़ (कठिन/जटिल), अधूरा ही न तूलानी (लंबा)।"

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सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान
लेख

सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान

नाम भी मुज़फ़्फ़र था और रहते भी मुज़फ़्फ़रनगर में थे... पूरा नाम था "नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान"। मुज़फ़्फ़रनगर हिंदुस्तान में एक ज़िला है, उन भले दिनों में यह नवाब साहब की जागीर थी। नवाब साहब को इमारतें बनवाने (تعمیرات) का शौक़ था। इसी शौक़ को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने एक बहुत बड़े बाग़ के बीचों...