लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो...
मुनाफ़...
Ummah Post
9 October, 2024

लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो...

मुनाफ़िक़ (पाखंडी) को नज़रअंदाज़ कर दो, बुरे को फाड़ दो...

और सबसे ख़ूबसूरत पर रुक जाओ...

इंसान भी किताबों की तरह होते हैं...

कुछ लोग सिर्फ़ सरवरक़ (कवर) से धोखा देते हैं,

जबकि कुछ का अंदरूनी मवाद (सामग्री) हैरान करने वाला होता है, हालांकि उनका कवर बिल्कुल आम सा लगता है।

पहली नज़र में प्रभावित न हों, वक़्त हर चीज़ का फ़ैसला कर देता है।

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भविष्य में लोग तरावीह में क्या पढ़ेंगे?
लेख

भविष्य में लोग तरावीह में क्या पढ़ेंगे?

मुअतसिम बिल्लाह के बाद उनका बेटा वासिक़ बिल्लाह 227 हिजरी में राजसिंहासन (ताज-ओ-तख़्त) का वारिस बना। वह गुमराह करने वाले विचारों और अक़ीदों का मालिक था और मोतज़ली (Mu'tazilite) अक़ीदों, विशेष रूप से 'ख़ल्क़-ए-क़ुरआन' (क़ुरआन के मख़्लूक़ होने) के अक़ीदे के प्रचार-प्रसार में अपने बाप से भी आगे बढ़ गया...