"वह एक सज्दा जिसे तू गिराँ (भारी/मुश्किल) समझता है,
हज़ार स...
Ummah Post

"वह एक सज्दा जिसे तू गिराँ (भारी/मुश्किल) समझता है,

हज़ार सज्दों से देता है आदमी को नजात (मुक्ति)।" — अल्लामा इक़बाल

Share this article
एक बोर्ड और दो वाक्य:
लेख

एक बोर्ड और दो वाक्य:

एक अंधा आदमी एक इमारत के पास बैठा था और पास में एक बोर्ड रखा था जिस पर लिखा था, "मैं अंधा हूँ, कृपया मेरी मदद करें।" साथ में उसकी टोपी पड़ी हुई थी जिसमें कुछ सिक्के थे। एक आदमी वहाँ से गुज़र रहा था। उसने अपनी जेब से कुछ सिक्के निकाले और टोपी में डाल दिए। अचानक उसकी नज़र बोर्ड पर पड़ी। उसने बोर्ड...