रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,
ख़ुदा के बाद बस...
Ummah Post
21 October, 2025

रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,

ख़ुदा के बाद बस वो हैं, फिर उसके बाद क्या कहिए!

शरीअत का है ये इसरार, ख़ातमुल-अम्बिया कहिए,

मोहब्बत का तक़ाज़ा है कि महबूब-ए-ख़ुदा कहिए!

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हज़रत इब्राहिम बिन अदहम (रह.) की छह बहुमूल्य नसीहतें
लेख

हज़रत इब्राहिम बिन अदहम (रह.) की छह बहुमूल्य नसीहतें

एक व्यक्ति आपके पास आया और अर्ज़ किया कि कुछ नसीहत फ़रमाइए। आपने फ़रमाया, "छह (6) बातें बताता हूँ, उन पर अमल करो, फिर कुछ भी करोगे तो नुक़सान न पहुँचेगा।" आपने उन छह बातों की व्याख्या इस तरह की: 1. जब गुनाह करो तो उसकी (अल्लाह पाक की) नेमत मत खाओ। दुनिया में जो कुछ भी है, वह उसी की नेमत है; क्या...