ज्ञान का आभार (शुकराना) व्यक्त करने में से यह भी है कि जब आप...
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ज्ञान का आभार (शुकराना) व्यक्त करने में से यह भी है कि जब आप किसी सभा में हों, और कोई ऐसा मुद्दा चर्चा में आ जाए जो आप न जानते हों और आप उस सभा से वह सीख लें; तो फिर जब आप किसी दूसरी सभा में हों और वही मुद्दा दोबारा चर्चा में आ जाए तो आप कहें: "सच बात तो यह है कि मुझे इस मुद्दे के बारे में नहीं पता था, लेकिन मैंने फ़लाँ सभा में फ़लाँ व्यक्ति से यह सुना, तब मुझे मालूम हुआ।" जब आप ऐसा करेंगे तो मानो आपने ज्ञान का आभार अदा कर दिया।

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हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
लेख

हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

मुदर्रिसीन (शिक्षकों) को चाहिए कि हर तालिब-ए-इल्म (छात्र) को पूरा अरबी पढ़ाना ज़रूरी न समझें, जिसके अंदर मुनासबत (योग्यता) देखें, और फ़हम-ए-सलीम (सही समझ) पाएँ, उसको सब किताबें पढ़ा दें, और जिसको मुनासबत न हो, या फ़हम-ए-सलीम न हो, उसको बक़द्रे-ज़रूरत (ज़रूरत के मुताबिक़) मसाइल पढ़ा कर कह दें कि जाओ...