*{इस्लाम से बगावत, कायनात (ब्रह्मांड) के शासक से बगावत है}*...
Ummah Post
By Mohd
6 November, 2020

*{इस्लाम से बगावत, कायनात (ब्रह्मांड) के शासक से बगावत है}*

यानी अल्लाह के नज़दीक इंसान के लिए सिर्फ एक ही जीवन-प्रणाली (निज़ाम-ए-ज़िंदगी) और एक ही जीवन-शैली सही और दुरुस्त है, और वह यह है कि इंसान अल्लाह को अपना मालिक और माबूद (पूज्य) स्वीकार करे और उसकी बंदगी व गुलामी में अपने आप को पूरी तरह सौंप दे, और उसकी इबादत का तरीका खुद ईजाद (आविष्कार) न करे; बल्कि उसने अपने पैगंबरों के माध्यम से जो हिदायत (मार्गदर्शन) भेजी है, बिना किसी कमी-बेशी (घटाने-बढ़ाने) के सिर्फ उसी का पालन करे। इसी सोच और अमल के तरीके का नाम "इस्लाम" है, और यह बात पूरी तरह सच है कि ब्रह्मांड का निर्माता और मालिक अपनी मख्लूक (सृष्टि) और प्रजा के लिए इस इस्लाम के अलावा किसी दूसरे तौर-तरीके को जायज़ स्वीकार न करे। आदमी अपनी मूर्खता (हमाक़त) से खुद को नास्तिकता (दहरियत) से लेकर शिर्क और मूर्तिपूजा तक हर विचारधारा और हर पंथ का पालन करने का हकदार समझ सकता है, मगर ब्रह्मांड के शासक (फरमांरवा-ए-कायनात) की नज़र में तो यह कोरी बगावत है।

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पांच व्यापक तफ़सीरें (पांच जामे तफ़ासिर)
लेख

पांच व्यापक तफ़सीरें (पांच जामे तफ़ासिर)

शेख़-उल-हदीस हज़रत मौलाना मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब (दामत बरकातुहुम) अपनी मशहूर तस्नीफ़ "उलूम-उल-क़ुरआन" में लिखते हैं: "यह पांच तफ़सीरें (यानी तफ़सीर-ए-कबीर, तफ़सीर इब्न कसीर, तफ़सीर-ए-क़ुर्तुबी, तफ़सीर रूह-उल-मआनी और तफ़सीर-ए-कश्शाफ़) अहक़र (इस नाचीज़) के मामूली ज़ौक़ के मुताबिक ऐसी हैं कि अगर...