अस्सलामु अलैकुम

इस्लामी इतिहास
किस्त नंबर 4

जिन्नातों...
Ummah Post
12 October, 2024

अस्सलामु अलैकुम

इस्लामी इतिहास

किस्त नंबर 4

जिन्नातों की पैदाइश (उत्पत्ति)

क़ुरआन और हदीस में जिन्नों का तज़किरा (उल्लेख) कसरत से आया है, इंसानों से पहले ही उनकी पैदाइश हो चुकी थी। अल्लाह तआला ने उनको आग से पैदा फ़रमाया। एक लंबे ज़माने तक वे ज़मीन में आबाद रहे, फिर उन्होंने फ़साद (उत्पात) मचाना और ख़ून बहाना शुरू किया, तो अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों के ज़रिए उन्हें समंदर के जज़ीरों (द्विपों) और दूर-दराज़ पहाड़ों की तरफ़ भगा दिया। इब्लीस (शैतान) भी जिन्नातों में से था लेकिन कसरत-ए-इबादत (अत्यधिक पूजा-पाठ) की वजह से फ़रिश्तों का सरदार बना दिया गया था। लेकिन जब अल्लाह तआला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के सामने सज्दा करने का हुक्म दिया, तो उसने तकब्बुर (घमंड) किया, और सज्दा करने से इंकार कर दिया। चुनांचे अल्लाह तआला ने धत्कार कर उसको दुनिया में भेज दिया और उससे तमाम नेमतें (वरदान) छीन लीं। इस तरह तकब्बुर ने उसे हमेशा के लिए ज़लील व रुसवा (अपमानित) कर दिया। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इस दुनिया में इंसान और जिन्नात दोनों की हिदायत (मार्गदर्शन) व रहनुमाई के लिए भेजे गए थे, चुनांचे अहादीस (हदीसों) में जिन्नों को इस्लाम की दावत देने का ज़िक्र मौजूद है और क़ुरआन मजीद में जिन्नातों की एक जमात (समूह) के ईमान लाने का भी तज़किरा मौजूद है।

Share this article
मतभेदों के बावजूद बेमिसाल इत्तिहाद – क़ैसर-ए-रोम को एक ऐतिहासिक जवाब
लेख

मतभेदों के बावजूद बेमिसाल इत्तिहाद – क़ैसर-ए-रोम को एक ऐतिहासिक जवाब

हज़रात-ए-सहाबा-ए-किराम (रज़ियल्लाहु अन्हुम) में कुछ मसलों पर मतभेद (इख़्तिलाफ़) रहा है; मगर एक-दूसरे के सम्मान (एहतराम) में कभी फ़र्क़ नहीं आया। कौन नहीं जानता कि ख़ून-ए-उस्मान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के मसले पर सहाबा-ए-किराम में शदीद (गंभीर) मतभेद हुआ और इसकी वजह से जंग भी हुई; मगर क्या मजाल कि उनके इस...