इस्लामी तारीख (इतिहास)
किस्त नंबर 7

क़ाबील और हाबील

क...
Ummah Post
17 October, 2024

इस्लामी तारीख (इतिहास)

किस्त नंबर 7

क़ाबील और हाबील

क़ाबील और हाबील हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के दो बेटे थे। दोनों के बीच एक बात को लेकर झगड़ा हो गया। क़ाबील ने हाबील का क़त्ल कर डाला, ज़मीन पर यह पहली मौत थी और इस बारे में अभी तक हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की शरीअत में कोई हुक्म नहीं मिला था, इसलिए क़ाबील परेशान था कि भाई की लाश का क्या किया जाए? अल्लाह तआला ने एक कौवे के ज़रिए उसको दफ़्न करने का तरीक़ा सिखाया। यह देखकर क़ाबील कहने लगा: हाय अफ़सोस! क्या मैं ऐसा गया-गुज़रा हो गया कि इस कौवे जैसा भी न बन सका। फिर उसने अपने भाई को दफ़्न कर दिया। यहीं से दफ़्न करने का तरीक़ा चला आ रहा है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ाबील के मुतअल्लिक़ (संबंध में) फ़रमाया: "दुनिया में जब भी कोई शख़्स ज़ुल्मन (अन्यायपूर्ण तरीके से) क़त्ल किया जाता है, तो उसका गुनाह हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के बेटे (क़ाबील) को ज़रूर मिलता है, इसलिए कि वह पहला शख़्स है जिसने ज़ालमाना क़त्ल की इब्तिदा (शुरुआत) की और यह नापाक तरीक़ा जारी किया।" (मुस्नद अहमद: 3623)। इसीलिए इंसान को अपनी ज़िंदगी में किसी गुनाह की ईजाद (आविष्कार) नहीं करनी चाहिए, ताकि बाद में उस गुनाह के करने वालों का वबाल (बोझ/सज़ा) उसके सर न आए।

Share this article
कलमा पढ़ी हुई मेम
लेख

कलमा पढ़ी हुई मेम

हमारे एक दोस्त थे; ज़ेहन (सोच) इस्लामी, लेकिन चेहरा-मोहरा ग़ैर-इस्लामी। हम सिर्फ़ उनके ज़ेहन पर ही अल्लाह का शुक्र अदा करते थे। मौसूफ़ (महोदय) कुछ समय के लिए इंग्लैंड तशरीफ़ ले गए, और जब उनकी वापसी हुई तो बगल में एक मेम (गोरी मेम) थीं! चूँकि मौसूफ़ का ताल्लुक एक पारंपरिक परिवार से था, इसलिए यह ख़...