"आदम के बेटे (इंसान) पर सबसे अजीब नेमतों में से एक भूल जाने की नेमत भी है। क्योंकि अगर भूलने की प्रक्रिया (अमल) न होती, तो इंसान किसी (तकलीफ, ग़म) को न भूल पाता, न ही उसकी हसरत कभी ख़त्म होती, न किसी मुसीबत पर उसे सब्र आता, न उसका ग़म मरता, और न उसकी नफ़रत और ग़ुस्सा कभी ख़त्म होता। न ही वह दुनिया की किसी भी चीज़ से लुत्फ़ अन्दोज़ (आनंदित) हो पाता क्योंकि वह हर समय आफतों (मुसीबतों) की याद में खोया रहता।"
~ इमाम इब्न अल-क़य्यिम (रहमतुल्लाह अलैहि)
मनक़ूल (नक़ल किया गया)