खामोशी अख्तियार कर लें मगर गिला मत करें। गोशा-नशीं (एकांत में) हो जाएं मगर अपना मियार (स्तर) मत गिराएं। इज्जत न मिले तो किनाराकशी (दूरी) कर लें। वक्त की भीख न मांगें; इज्जत और मोहब्बत के बगैर किसी रिश्ते का वजूद नहीं। इज्जत वह नहीं जो बातों से सुनाई जाती है; इज्जत वह है जो अमल (व्यवहार) में दिखाई देती है।
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