खामोशी अख्तियार कर लें मगर गिला मत करें। गोशा-नशीं (एकांत मे...
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खामोशी अख्तियार कर लें मगर गिला मत करें। गोशा-नशीं (एकांत में) हो जाएं मगर अपना मियार (स्तर) मत गिराएं। इज्जत न मिले तो किनाराकशी (दूरी) कर लें। वक्त की भीख न मांगें; इज्जत और मोहब्बत के बगैर किसी रिश्ते का वजूद नहीं। इज्जत वह नहीं जो बातों से सुनाई जाती है; इज्जत वह है जो अमल (व्यवहार) में दिखाई देती है।

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पिता का शिक्षाप्रद उत्तर
लेख

पिता का शिक्षाप्रद उत्तर

अबुल कलाम कहते हैं: एक रात खाने के समय मेरी माँ ने सालन (सब्ज़ी) और जली हुई रोटी मेरे पिता के आगे रख दी। मैं पिता की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करता रहा कि शायद वह ग़ुस्से का इज़हार करेंगे, लेकिन उन्होंने बेहद सुकून से खाना खाया और साथ ही मुझसे पूछा कि आज स्कूल में मेरा दिन कैसा गुज़रा? मुझे याद न...