कुछ राहों पर आपको तन्हा (अकेले) ही चलना पड़ता है, वहाँ न तो...
Ummah Post
5 November, 2024

कुछ राहों पर आपको तन्हा (अकेले) ही चलना पड़ता है, वहाँ न तो दोस्त आपका साथ दे सकते हैं, न ही अहल-ए-खाना (परिवार वाले), यहाँ तक कि शरीक-ए-हयात (जीवनसाथी) भी नहीं। वहाँ आप और सिर्फ आप होते हैं।

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अध्ययन का अनोखा लाभ
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अध्ययन का अनोखा लाभ

शेख़ सलमान अल-औदा अपनी किताब "ज़ंज़ाना" में लिखते हैं कि: एक मर्तबा मैंने अपने शेख़ से शिकायत की कि: मैंने एक किताब पढ़ी लेकिन मुझे उसमें से कुछ भी याद नहीं रहा, चुनाँचे उन्होंने मुझे एक खजूर दी और फ़रमाया: लो यह चबाओ! फिर मुझसे पूछा: क्या अब तुम बड़े हो गए? मैंने कहा: नहीं, फ़रमाया: लेकिन यह खजूर...