मैं ऐसी रात का इंतज़ार कर रहा हूँ, जहाँ मैं खुशी के मारे सो...
Ummah Post
5 November, 2024

मैं ऐसी रात का इंतज़ार कर रहा हूँ, जहाँ मैं खुशी के मारे सो न सकूँ।

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...और मलक-उल-मौत आ पहुँचा!!
लेख

...और मलक-उल-मौत आ पहुँचा!!

एक नौजवान लड़की एक सुपरमार्केट में अपने जिस्म की नुमाइश करते हुए फ़ित्ना अंगेज़ (उत्तेजक) अंदाज़ में जा रही थी। उसके अंदाज़ में ऐसी खुद-नुमाइश (दिखावा) और खुद-सताई (अहंकार) थी जैसे दुनिया उसी की वजह से पैदा की गई हो। વहाँ से एक नेक और सालेह (सज्जन) नौजवान गुज़र रहा था, उसने अज़-राह-ए-हमदर्दी (सहा...