अपने आप से दोस्ती निभाएं। 

अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतर...
Ummah Post
6 November, 2024

अपने आप से दोस्ती निभाएं।

अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतरिक संघर्ष) के शिकार हैं, तो आपकी ज़िंदगी बाहर से कैसे सामंजस्यपूर्ण (हम-आहंग) होगी?

दूसरों के साथ हमारे टकराव असल में उन्हीं हंगामों का अक्स (प्रतिबिंब) हैं जो हमारे अंदर पनप रहे होते हैं।

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मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी
लेख

मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी

शेख़ुल क़ुरआन मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद ज़रवली ख़ान साहब (रह.) फ़रमाते थे: मदारिस (मदरसों) के तलबा (छात्र) बहुत पाक मख़्लूक़ (पवित्र जीव) हैं। एक दिन हमारे मदरसे में एक तालिब-ए-इल्म (छात्र) को शरारत पर मैंने सज़ा दी, तो कुछ देर बाद मेरे हाथ ने हरकत करना छोड़ दिया और वह मुर्दा (बेजान) हो गया। मैंने...