*उर्दू के वर्णमाला (حروفِ تہجی) की दो किस्में हैं:*
नंबर 1:
*नुक्ते (बिंदु) वाले, जैसे:*
श (ش), च (چ), ज (ج), ज़ (ظ), ज़ (ض), क़ (ق), ग़ (غ), थ (ث), त (ت), ब (ب) वगैरह।
नंबर 2:
*बिना नुक्ते वाले, जैसे:*
ह (ح), अ (ع), त (ط), स (س), र (ر), स (ص), व (و), क (ک), ल (ل), म (م), द (د) वगैरह।
*बिना नुक्ते वाले अक्षर मज़बूत और शक्तिशाली माने जाते हैं और नुक्ते वाले कमज़ोर व कम-ताक़त माने जाते हैं।*
*अब आप गौर करें कि:*
ससुराल (سسرال)
ससुर (سسر)
सास (ساس)
साला (سالا)
साली (سالی)
*किसी में भी नुक्ता नहीं है क्योंकि ये तमाम रिश्ते बहुत मज़बूत और ताक़तवर होते हैं।*
*दामाद* (داماد) के किसी अक्षर पर भी नुक्ता नहीं है क्योंकि यह भी शादी के बाद बहुत शक्तिशाली हो जाता है।
आप *दामाद* और *सास* की ताक़त का अंदाज़ा इस बात से लगाएं कि इन्हें जिधर से भी पढ़ेंगे, ये *दामाद* और *सास* ही रहेंगे!
यानी दोनों का सीधा तो सीधा है ही, मगर दोनों का उल्टा भी सीधा होता है!
😂
*इसलिए इन पांच स्तंभों (अरकान-ए-ख़म्सा) का विशेष ख़याल रखें!*