"औरत को जितनी आज़ादी की ज़रूरत थी 'इस्लाम' दे चुका है।.. ♥️...
Ummah Post
9 November, 2024

"औरत को जितनी आज़ादी की ज़रूरत थी 'इस्लाम' दे चुका है।.. ♥️

मज़ीद (और अधिक) उसे जो चाहिए वह आज़ादी नहीं, बे-हयाई (अश्लीलता) है।"

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ईमान कितनी बड़ी नेमत है
लेख

ईमान कितनी बड़ी नेमत है

हज़रत मौलाना पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी ने एक वाक़या सुनाया कि 1994 में जब समरक़ंद जाने का मौक़ा मिला, तो जामिया मस्जिद समरक़ंद में जुमा का ख़ुत्बा दिया। जुमा की नमाज़ के बाद कुछ नौजवान मेरे पास आए और कहने लगे, "हज़रत! आप हमारे घर तशरीफ़ ले चलें, हमारी वालिदा (माता जी) आपसे मिलना चाहती हैं।" मैं...