बीवी ग़ुस्से पर कंट्रोल न करते हुए अपने शौहर से कहने लगी, "अ...
Ummah Post
10 November, 2024

बीवी ग़ुस्से पर कंट्रोल न करते हुए अपने शौहर से कहने लगी, "अगर तुम मर्द हो तो मुझे तलाक़ दो, एक सेकंड भी मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती।" उसका शौहर ख़ामोशी से उसकी बात को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करने लगा।

लेकिन बीवी ने फिर कहा, "तुम मर्द नहीं, अगर हो तो मुझे तलाक़ दो!" हालांकि उसकी बीवी नेक, पाकबाज़ और अच्छी सीरत वाली औरत थी, लेकिन यह सब ग़ुस्से की हालत में उसकी ज़ुबान से निकल रहा था और इस मौक़े पर शैतान पूरी कोशिश में था कि मियाँ-बीवी को एक दूसरे से अलग कर दे।

औरत का ग़ुस्सा जब और बढ़ा तो कहा, "अगर तुम मर्द हो तो यह करो, वो करो वगैरह-वगैरह।"

आख़िरकार बीवी ने कहा, "मुझे अभी फ़ौरन तुम्हारा जवाब चाहिए और तुम मुझे इसी वक़्त जवाब दो।" आखिरकार आदमी ने मजबूर होकर एक काग्रज़ पर चंद लाइनें लिखीं, उसे लिफ़ाफ़े के अंदर रखा और उसके हाथ में पकड़ाते हुए कहा, "जाओ, फ़ी अमानिल्लाह (अल्लाह की हिफ़ाज़त में जाओ)। यह वही दरवाज़ा है जिससे तुम मेरे साथ आई थीं, मैंने साबित कर दिया कि मैं एक मर्द हूँ, तुम अभी अपने मायके जाओ।"

चुनांचे औरत ने अपना सामान वगैरह बांधा और अपने मायके की तरफ चल दी।

जब यह बात लोगों में पहुँची तो किसी को यक़ीन नहीं हो रहा था, क्योंकि आदमी बड़ा नेक और रहमदिल इंसान था; यह कैसे हो सकता है कि वह अपनी बीवी के साथ ऐसा बर्ताव करे।

उधर मायके में बीवी के दिन गुज़रते गए और आहिस्ता-आहिस्ता उसका दिल वहाँ घुटने लगा, उसे तन्हाई सताने लगी। तो एक दिन उसने शौहर को फ़ोन किया और रोने लगी, कहा, "तुम मेरा सब कुछ हो, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।

तुम मेरा सब कुछ हो,

मेरी जान हो,

मेरी रूह हो,

बस तुम ही सब कुछ हो, वगैरह-वगैरह।"

आदमी ने जवाब देते हुए कहा, "उम्म-ए-मोहम्मद! तुम आख़िर अब मुझसे क्या चाहती हो?"

बीवी ने कहा, "मैं ग़लत थी," और कहा, "माना कि तुम मर्द हो, लेकिन मैं एक नाक़िस-उल-अक़्ल (कम समझ) औरत हूँ।"

आदमी ने जवाब दिया, "यह तो तुम्हारा मुतालिबा (मांग) था जो मैंने पूरा कर दिया, और तुम मुझे साबित करने दो कि मैं मर्द हूँ।"

बीवी ने कहा, "माना कि तुम मर्द हो, लेकिन मैं एक नाक़िस-उल-अक़्ल औरत हूँ।"

आदमी ने जब देखा कि औरत उसके सामने अपनी बेबसी और दुख का इज़हार कर रही है, तो उसने कहा, "अच्छा जाओ, ज़रा वो लिफ़ाफ़ा खोलकर देखो तो सही जो मैंने तुम्हें लिखकर दिया था।"

औरत फ़ोन को होल्ड पर रखकर उठी और उस लिफ़ाफ़े को खोलकर उसमें मौजूद काग़ज़ के टुकड़े को देखा, तो उसमें लिखा हुआ था:

(ऐ मेरी प्यारी 🌺उम्म-ए-मोहम्मद!🌺 अगर आसमान ज़मीन पर भी गिर जाए, तब भी मैं तुम्हें हरगिज़-हरगिज़ तलाक़ नहीं दूँगा।)

यह था असल काग्रज़ जो उसने उस वक़्त बीवी को दिया था।

लेकिन बीवी ने समझा था कि इसमें 'तलाक़, तलाक़, तलाक़' लिखा होगा।

जब बीवी ने काग़ज़ पढ़ा तो रोने लगी और रोते हुए कहा:

"ऐ मेरे सरताज! आप तो मर्दों के मर्द निकले।"

नोट:

बहनों और भाइयों!

देखें किस तरह कहानी का रुख बदल गया जब शौहर ने अपने ग़ुस्से पर कंट्रोल किया और अपना घर बर्बाद होने से बचा लिया। यही है असल मर्दानगी! 😍

जो लड़की ज़ुबान दराज़ (तेज़ ज़ुबान वाली) होती है, उसे तलाक़ होती है।

जो लड़की बहुत ज़्यादा ज़िद्दी होती है, उसे तलाक़ होती है।

जो लड़की हर बात पर दूसरों से ट्यूशन (सलाह) लेती है, उसे तलाक़ की डिग्री ज़रूर मिलती है।

जो लड़की दूसरे लोगों की बातों में आ जाती है, वह अपना घर ख़राब कर लेती है।

घर को बर्बाद करना और आबाद करना लड़की के अपने हाथ में होता है।

समझदार लड़की वह होती है जो मायके की बातें ससुराल में न करे और ससुराल की बातें मायके में न जाकर बताए।

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