"मेरे घर वाले मुझसे ज़रा भी खुश नहीं होते... 
रात को बोलते...
Ummah Post
11 November, 2024

"मेरे घर वाले मुझसे ज़रा भी खुश नहीं होते...

रात को बोलते हैं: 'सोती क्यों नहीं हो?'

और सुबह के टाइम नींद से उठा कर बोलते हैं: 'उठती क्यों नहीं हो?' 😥😥"

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आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी
लेख

आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी

दफ़्तर के करीब फ़ुटपाथ पर बैठे उस बूढ़े से आते-जाते जूते पॉलिश करवाना उसका नियम था। मगर एक अजीब बात जो मैं पिछले कई दिनों से नोट कर रहा था, वह यह थी कि वह हर बार जूता पॉलिश करवाने के बाद उस बुजुर्ग से उलझता कि "पॉलिश ठीक नहीं की, इसलिए दोबारा करो।" और हैरानी की बात यह कि दोबारा पॉलिश करवाने का मुआवज...