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दिल का बोझ किसी के सामने हल्का करते-करत...
Ummah Post
11 November, 2024

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दिल का बोझ किसी के सामने हल्का करते-करते, बाज़ दफ़ा (कभी-कभी) हम अपनी जात (वजूद/मर्यादा) को ही दूसरों के सामने हल्का (कमतर) कर देते हैं। परेशानियाँ बताने से कम हो सकती हैं, लेकिन! उसको बताएँ जो इस क़ाबिल हो।

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आज ही तो ग़रीबी का असली मज़ा मिला है
लेख

आज ही तो ग़रीबी का असली मज़ा मिला है

एक गाँव में एक ग़रीब नाई रहा करता था जो एक पेड़ के नीचे कुर्सी लगाकर लोगों की हजामत (बाल-दाढ़ी) बनाया करता था। उसकी गुज़र-बसर बहुत मुश्किल से हो रही थी। उसके पास रहने को न कोई घर था, न पत्नी थी और न ही बच्चे थे। सिर्फ़ एक चादर और एक तकिया ही उसकी कुल संपत्ति थी। जब रात होती, तो वह एक बंद पड़े स्कूल...