"इल्म-ओ-अदब (ज्ञान और साहित्य) के सारे ख़ज़ाने गुज़र गए,
क्...
Ummah Post
12 November, 2024

"इल्म-ओ-अदब (ज्ञान और साहित्य) के सारे ख़ज़ाने गुज़र गए,

क्या ख़ूब थे वो लोग जो पुराने गुज़र गए।

बाक़ी है ज़मीन पे फ़क़त (सर्फ़) आदमी की भीड़,

इंसान को मरे हुए तो ज़माने गुज़र गए।" 🍂

Share this article
हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)
लेख

हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)

एक बार हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी (रह.) पर ग़द्दारी (राजद्रोह) का मुक़दमा चला और फ़िरंगी (अंग्रेज़) की अदालत हॉल कराची में उनकी पेशी हुई। मौलाना मोहम्मद अली जौहर और बहुत सारे दूसरे अकाबरीन (वरिष्ठ नेता) भी वहाँ जमा थे। फ़िरंगी ने बुलाया और कहा, "हुसैन अहमद! यह जो तुमने फ़तवा दिया है कि अंग्रेज़ की...