"आजिज़ी (विनम्रता) अख्तियार करें, 
क्योंकि इंसान की अकड़ खु...
Ummah Post
12 November, 2024

"आजिज़ी (विनम्रता) अख्तियार करें,

क्योंकि इंसान की अकड़ खुदा की पकड़ पर (ही) खत्म होती है।" 💯

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हज़रत अबू क़िलाबा के सब्र व शुक्र की मर्क़ूम कहानी
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हज़रत अबू क़िलाबा के सब्र व शुक्र की मर्क़ूम कहानी

हज़रत अबू क़िलाबा रहमतुल्लाह अलैह एक जलील-उल-क़द्र (उच्च कोटि के) ताबेई और बहुत बड़े मुहद्दिस (हदीस के विद्वान) हैं। वह हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु के शागिर्द हैं। आप बसरा में रहते थे और अपने ज़माने के अत्यंत साबिर व शाकिर (धैर्यवान और कृतज्ञ) इंसान थे। इतिहास में आपके सब्र व शुक्र की एक घटना मिलती...