"रहमत (कृपा) को ज़हमत (आफ़त), मोहब्बत को मुसीबत, इज़्ज़त को...
Ummah Post
12 November, 2024

"रहमत (कृपा) को ज़हमत (आफ़त), मोहब्बत को मुसीबत, इज़्ज़त को तोहमत (कलंक), हीरे को पत्थर और पत्थर को सितारा बनते देर नहीं लगती।" ✨⏳

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अपनी ज़िंदगी का जायज़ा
लेख

अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन। ८. जब तुझे वह हादसा मौत का पेश आएगा जिसको कोई नहीं टाल सकता, तो माल-ओ-दौलत और नौकर-ओ-ख़ादिम तेरे कुछ भी काम न आएँगे।...