जिंदगी में हम कई मोर्चों (محاذوں) पर लड़ रहे होते हैं—घर, का...
Ummah Post
12 November, 2024

जिंदगी में हम कई मोर्चों (محاذوں) पर लड़ रहे होते हैं—घर, काम, और रिश्ते सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियां और उम्मीदें रखते हैं। हमारे घर वाले हमारे रोज़मर्रा के संघर्ष और नौकरी के दबाव को नहीं समझते, और हमारी नौकरी हमारी निजी जिंदगी और घर की ज़रूरतों से बेखबर रहती है। दोस्त, साथी और अज़ीज़ (प्रियजन) भी हमारी नई और पुरानी जिम्मेदारियों का बोझ हमेशा पूरी तरह नहीं समझ पाते।

जिंदगी के इस सफर में, आपका जीवनसाथी आपसे बिना किसी शर्त के प्यार और समर्थन की उम्मीद रखता है, चाहे आप कितने ही दबाव में क्यों न हों, और चाहे आप उसे कितना भी समझाने की कोशिश करें। आपका हर कदम और हर कुर्बानी अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती है, और यह वह चीज़ है जिसे अक्सर कोई नहीं देखता या समझता। आपके दिल की स्थिति और आपकी खामोशी में छिपी कुर्बानियां बहुसंख्यक (ज्यादातर लोगों) के लिए छिपी रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद आप हर रोज़ दृढ़ संकल्प (ثابت قدمی) से आगे बढ़ते हैं। ❤️‍🩹

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दीवार पर पिता के हाथों के निशान।
लेख

दीवार पर पिता के हाथों के निशान।

अब्बा जी बूढ़े हो गए थे और चलते-चलते दीवार का सहारा लेते थे। नतीजतन दीवारों का रंग खराब होने लग गया, जहां भी वह छूते थे वहां दीवारों पर उनकी उंगलियों के निशान छप जाते थे। मेरी पत्नी को जब पता चला तो वह अक्सर गंदी दिखने वाली दीवारों के बारे में मुझसे शिकायत करती। एक दिन सर में दर्द हो रहा था तो अब...