"बेशक दिल मुर्दा भी हो जाते हैं, और ज़िंदा भी; जब यह मुर्दा...
Ummah Post
17 November, 2024

"बेशक दिल मुर्दा भी हो जाते हैं, और ज़िंदा भी; जब यह मुर्दा हो जाएं, तो उनको फ़राएज़ (अनिवार्य इबादत) अदा करने पर लगाओ;

फिर जब यह ज़िंदा हो जाएं, तो दिल को नफ़्ली आमाल (स्वैच्छिक इबादत) पर राग़िब करो (प्रेरित करो)!"

इमाम हसन बसरी रहिमहुल्लाह

(अज़-ज़ुह्द लिल-इमाम अहमद : 216/1)

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झूठी उम्मीद और अधूरे वादे का घातक अंजाम
लेख

झूठी उम्मीद और अधूरे वादे का घातक अंजाम

एक आदमी कई रातें सख्त सर्दी में आराम से सोता रहा। एक दिन किसी राहगीर ने गुजरते हुए उससे कहा: "मैं तुम्हें एक गर्म रज़ाई लाकर दूंगा"!! वह राहगीर अपनी मंज़िल को चला गया और रज़ाई लाने का वादा भूल गया, बूढ़ा आदमी उसका इंतज़ार करते हुए सर्दी से मर गया। लोगों को उसकी लाश के पास एक लिखा हुआ पर्चा (नोट)...