"गिद्ध एक मुर्दाखोर (मरे हुए जानवरों का मांस खाने वाला) पक्षी है, जिसकी फितरत में अल्लाह तआला ने सोच-विचार का एक संदेश दिया है।
खाते समय उसका पेट तो भर जाता है लेकिन भूख खत्म नहीं होती, तो वह भागना शुरू कर देता है और भागते-भागते खाया हुआ सब उगल (उल्टी कर) देता है। उल्टी करने के बाद वह फिर से खाने लगता है, फिर भी पेट तो भर जाता है लेकिन भूख खत्म नहीं होती। इसी तरह वह बार-बार यही प्रक्रिया दोहराता है लेकिन भूख खत्म नहीं होती क्योंकि वह हराम और मुर्दार (मरा हुआ) खाता है।"
यह कुदरत के बनाए हुए सार्वभौमिक (आफाकी) नियम हैं, जो हराम खाने वालों के लिए सोच का विषय (लम्हा-ए-फिक्रिया) हैं। कुदरत कुछ लोगों को अधिकार देकर पूरा मौका देती है कि जितना खा सकते हो खा लो, लेकिन तुम संतुष्टि (तृप्ति) के आनंद से हमेशा वंचित रहोगे। हराम का माल खाना तुम्हारे लिए एक मुसीबत और मशक्कत के अलावा कुछ नहीं है; हराम खाने से पेट तो भर जाएगा लेकिन तुम्हारी भूख कभी खत्म नहीं होगी।!!
अल्लाह पाक हम सबको रिज़्क-ए-हलाल (वैध आजीविका) खाने की तौफीक अता फरमाए। आमीन 🤲🏻