एक बदज़ुबान (कटुभाषी) व्यक्ति अपनी कड़वी बातों से दूसरों को तकलीफ़ देता है, उसकी ज़ुबान की सख़्ती से रिश्ते कमज़ोर और दिल मजरूह (घायल) होते हैं। अच्छे अख़्लाक़ (शिष्टता) की कमी उसकी शख़्सियत (व्यक्तित्व) को नकारात्मक बना देती है, और बदज़ुबानी से लोगों का एहतराम (सम्मान) और एतमाद (विश्वास) खो जाता है। इंसान को चाहिए कि अपनी ज़ुबान को नर्म और अख़्लाक़ को बेहतर रखे।
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