*✍🏻 ज़िंदगी के हर गुज़रते दिन में अगर आपको एक लम्हा भी ख़ुशी का मयस्सर (प्राप्त) हो, तो उसी लम्हे का शुक्रिया अदा किया करें; अपनी ज़ुबान और दिल को अल्लाह की नाशुक्रगुज़ारी से बचाएं।"*
माह-ए-रमज़ानुल मुबारक मुसलमानों के लिए महज़ एक इबादती महीना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा महीना है जो न सिर्फ़ व्यक्ति की रूहानी (आध्यात्मिक) तरबियत (प्रशिक्षण) करता है, बल्कि सामाजिक जीवन पर गहरे और सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह महीना एक ऐसा अवसर प्रदान करता है जहाँ इंसान व्यक्तिगत सुधार के साथ-साथ सामा...